रांची, अप्रैल 11 -- रांची के सुखदेवनगर क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई से जुड़े महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस राजेश शंकर की कोर्ट ने निर्माण ध्वस्त किए जाने पर नाराजगी जताते हुए प्रशासन से पूछा कि कब्जा हटाने के बजाय सीधे संरचना क्यों तोड़ी गई। प्रार्थी से भी तथ्यों को छुपाने के आरोप पर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान कोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में हेहल के अंचलाधिकारी (सीओ) की ओर से शोकॉज का जवाब दायर किया गया। इसमें बताया गया कि हस्तक्षेपकर्ताओं को तीन बार नोटिस दिया गया था, लेकिन उन्होंने आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। इसके बाद निर्माण ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई। इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रशासन को पहले भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई करनी चाहिए थी, ...
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