नई दिल्ली, सितम्बर 29 -- सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी के कबूलनामे के आधार पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाकर उसे एहतियातन हिरासत (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में नहीं रखा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने 2024 में उत्तर प्रदेश के संभल में हुई सांप्रदायिक हिंसा में कथित भूमिका निभाने के आरोपी मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द करते हुए यह फैसला दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 के गलत इस्तेमाल और एक व्यक्ति को गैर कानूनी तरीके से हिरासत में रखने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें एनएसए के तहत अफरोज की हिरासत को सही ठहराया गया था। पीठ ने फैसले में कहा...