नई दिल्ली, फरवरी 23 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार का कहा कि महिलाओं, खासकर बच्चियों के खिलाफ भेदभाव देश के कई हिस्सों में व्यापक रूप से प्रचलित है। शीर्ष अदालत ने कहा कि 'कन्या भ्रूण हत्या' महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ भेदभाव जैसी सामाजिक बुराई का एक क्रूर उदाहरण है। शीर्ष अदालत ने गुरुग्राम के एक रेडियोलॉजिस्ट के खिलाफ गर्भाधान पूर्व एवं प्रसव पूर्व निदान तकनीक (लिंग चयन निषेध) (पीसीपीएएनडीटी) अधिनियम, 1994 के तहत दर्ज मामला रद्द करने से इनकार करते हुए यह टिप्पणी की। जस्टिस मनोज मिश्रा और उज्जल भुइयां की पीठ ने मुकदमा रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि देश के कई हिस्सों में आज भी महिलाओं और बच्चियों के प्रति भेदभाव व्याप्त है। पीठ ने कहा कि इस सामाजिक बुराई का क्रूर और घिनौना रूप कन्या भ्रूण हत्या के रूप में देखने को मिलता है। इस प्रकार के ...