जौनपुर, अप्रैल 8 -- नौपेड़वा, हिन्दुस्तान संवाद। स्थानीय बाजार में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के छठे दिन मंगलवार की रात्रि श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथा वाचक आचार्य डॉ. जयेश मिश्र ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह एक संस्कार है, जिसका पालन सनातन धर्म ही विधिवत करता है। रुक्मिणी विवाह कथा का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि जीव रूपी पिता जब नारायण रूपी वर का चरण धोता है तो अहंकार समाप्त हो जाता है और ममता रूपी बेटी का हाथ समर्पित करने से ममता पूर्ण रूप से समर्पित हो जाती है।उन्होंने कहा कि विवाह के माध्यम से जीव ब्रह्म का साक्षात्कार करता है और जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझता है। गज-ग्राह प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपने दास की मुक्ति बाद में करते हैं, लेकिन दासानुदास की मुक्ति पहले करते हैं। कथा के ...