मुंगेर, जुलाई 7 -- मुंगेर, निज प्रतिनिधि। एक समय समृद्ध और आबाद महेशपुर गांव आज गंगा के कटाव की त्रासदी झेल रहा है। वर्षों पहले आए भीषण कटाव में पूरा गांव गंगा में समा गया था। विस्थापन के बाद बचा हुआ महेशपुर अब दो गांवों में विभक्त हो गया है। किसानों को आज भी अपने पुरखों की जमीन और डूबे हुए गांव के गंगा से वापस निकलने की आस है। गंगा की धारा हर साल अपना रुख बदल रही है। नदी के किनारे बची हुई खेती की जमीन भी अब कटाव की जद में आ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गंगा में खेत समा जाने से किसानों को हर साल लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। बाढ़ के बाद उपजाऊ जमीन बालू में तब्दील हो जाती है। खेती लायक जमीन न बचने से किसान कर्ज में डूबते जा रहे हैं। स्थानीय किसान अनितेश कुमार ने बताया, हर साल बाढ़ के कारण जमीन घटती ही जा रही है। गंगा थोड़ी-थोड़ी जमीन काट ...