गोंडा, अप्रैल 9 -- गोण्डा, संवाददाता। जिले के निजी विद्यालयों में नौनिहालों को पढ़ाना आम आदमी के लिए मुश्किल होता जा रहा है। शिक्षा के अधिकार को लेकर शासन-प्रशासन भले ही गंभीर हो, लेकिन निजी स्कूलों पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। मोटे कमीशन एवं मुनाफा कमाने के चक्कर में मंहगी किताबें और कॉपियों के सेट दुकानों से अभिभावकों को मुहैया कराई जा रही हैं। आलम यह है कि जीके की तीस पन्नों की किताब 264 रुपये में दी जा रही है। शहर के एक प्रसिद्ध स्कूल में कक्षा आठ की किताब कापी का दाम करीब 8862 रुपये की होने जानकारी दुकान पर चस्पा है। शिक्षा क्षेत्र के जुड़े लोगों के मुताबिक किताबों के प्रकाशक निजी स्कूलों के मिलकर मन-माफिक रेट पर अपनी किताबें बेचवाते हैं। इसके लिए अभिभावकों को जेबें ढीली करनी होती है। मौजूदा समय में नर्सरी की पढ़ाई हाईस्कूल व इंट...