लखनऊ, मार्च 25 -- उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की ओर से दो दिवसीय राज्य नाट्य समारोह के अन्तिम दिन हास्य नाटक दिल की दुकान का मंचन किया गया। संत गाडगे जी महराज प्रेक्षागृह में कानपुर की अनुभूति नाट्य इकाई के कलाकारों द्वारा मंचित हुए नाटक का निर्देशन रतन सिंह राठौर ने किया।राजेन्द्र कुमार शर्मा के लिखे ने इस नाटक में संदेश दिया कि परिवार में परस्पर सामंजस्य ही सफलता का आधार है। कहानी के अनुसार बाजारवाद के इस युग में एक दुकान ऐसी भी परिकल्पित की गई जहां लोग अपने मन माफिक दिल का चयन कर सकते हैं। नाटक में सबसे पहले ऐसा परिवार दिखाया गया जिसका नायक पहले दर्जे का कंजूस होता है। इसके चलते उसकी पत्नी तंग आ कर उसे बादशाह का दिल लगवा देती है। उसकी यह युक्ति काम करती है मगर बाद में अति हो जाती है। वह कंजूस, हकीकत में अपने को बादशाह समझ कर अपना धन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.