जमशेदपुर, जुलाई 10 -- आसेका (अदिवासी सोशियो-एजुकेशनल एंड कल्चरल एसोसिएशन) झारखंड की एक महत्वपूर्ण बैठक घाटशिला के पावड़ा कॉलेज कॉलोनी में संगठन के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मांडी की अध्यक्षता में संपन्न हुई। इस बैठक में ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष (1925-2025) पूरे होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे मिशन पर गहन चर्चा की गई और अब तक की प्रगति की समीक्षा की गई।बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि ओलचिकी मिशन का मुख्य संकल्प संताली आदिवासी समाज के शत-प्रतिशत लोगों को ओलचिकी लिपि सिखाना था। हालांकि, विचार-विमर्श के बाद यह निष्कर्ष निकला कि इस मिशन को जितनी सफलता मिलनी चाहिए थी, उतनी सफलता अब तक हासिल नहीं हो सकी है। इसके पीछे समाज के प्रमुख संगठनों की उदासीन पहल को भी एक बड़ा कारण माना गया।

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