लखनऊ, अप्रैल 10 -- यदि दर्द के बावजूद सामान्य प्रसव नहीं हो पा रहा है तो भी सिजेरियन से महिलाओं को बचाया जा सकता है। गुनगुने पानी के टब में बिठाया जा सकता है। इससे सामान्य प्रसव की उम्मीद बढ़ जाती है। यह जानकारी महाराष्ट्र में स्त्री व प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम वर्मा शिव कुमार ने दी। केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेई सांइटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ऑब्स एंड गाइनी सोसाइटी की तरफ से आयोजित आर्ट ऑफ बर्थिंग कानक्लेव में डॉ. पूनम वर्मा ने कहा कि सामान्य प्रसव के मुकाबले सिजेरियन में अधिक जोखिम होता है। सिजेरियन का दर्द प्रसूता को झेलना पड़ता है। पांच से सात दिन प्रसूता को बिस्तर पर गुजारने पड़ते हैं। संक्रमण की आशंका रहती है। लिहाजा डॉक्टरों को सिजेरियन से प्रसव कराने का विकल्प अंतिम रखना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी दर्द से बचने का रास्ता नहीं च...
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