कानपुर, दिसम्बर 5 -- कानपुर। शरीर में ऑटो इम्यून डिसऑर्डर के चलते नवजात टाइप वन डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं। जागरुकता ही इससे बचाव का पहला चरण है क्योंकि, समय पर इलाज मिले तो डायबिटीज ग्रस्त बच्चे स्वस्थ रह सकेंगे। यह बातें लखनऊ से आए डॉ. अजय तिवारी ने सीएसजेएमयू स्थित ऑडिटोरियम में स्टैंड और टी वन यूपी 2025 के तीन दिवसीय कार्यक्रम के पहले दिन कहीं। उन्होने कहा कि पहले गांवों में लोगों को बच्चों में डायबिटीज होने की जानकारी नहीं थी, वह उसे सूखा रोग समझते थे। पैदा होने वाले बच्चों में नियोनेटल डायबिटीज होती है। यह 90 प्रतिशत तक ठीक हो जाती है। ऑटो इम्यून डिसऑर्डर से होने वाली डायबिटीज छह माह की उम्र के बाद बच्चों को होती है। इसमें इंसुलिन बनाने वाली बीटा सेल के खिलाफ एंटी बॉडी बन जाती है। शरीर किसी वायरस से लड़ने में एंटी बॉडी डेवलप करता ...
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