कुशीनगर, मार्च 16 -- कुशीनगर, हिटी। क़यामत के वक़्त जब हर तरफ नफ़्सी नफ़्सी का आलम होगा और कोई किसी को पहचानेगा नहीं, ऐसे में क़ुरआन, नमाज़ और रोज़े की शिफारिश ही हर नेक बंदे के काम आएगी। इसलिए ऐ मोमिनों तुम पांचों वक़्त की नमाज़ के पाबन्द बन जाओ और नेक नियत से रमज़ान के पूरे रोज़े रखो।ये बातें मदरसा मोआज़ बिन ज़बल बतरौली बाजार के मौलाना सरफ़राज़ अहमद क़ासमी ने कही। उन्होंने कहा कि एक मर्तबा रसूले पाक सल्लल्लाहु अलैहिवसल्लम के पास एक शख्स आया और कहने लगा की ऐ अल्लाह के रसूल अगर मैं गवाही दूं और ये कहूं की अल्लाह के सिवा कोई मआबूद नहीं और नमाज़ पढ़ूं रोज़ा रखूं तो मेरा हिसाब किन लोगों के साथ होगा। तो आपने फरमाया कि अगर तूने ये तीनों काम कर लिए तो क़यामत के दिन तेरा हिसाब शुहदा और सालेहीन के साथ होगा। क़यामत के दिन रोज़ा और कुरान नेक बंदे की सिफारिश करेंगे। रोज़ा...
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