नई दिल्ली, अप्रैल 22 -- नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) के पास सार्वजनिक उपयोग की भूमि के रूप में दर्ज भूमि की श्रेणी बदलने का कोई अधिकार नहीं है, ताकि उस पर भूमिधारी अधिकार दिए जा सकें। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एनवी अंजारिया की पीठ ने फैसले में स्पष्ट किया है कि 'भूमि की श्रेणी में किसी भी तरह के बदलाव के लिए जमींदारी उन्मूलन अधिनियम में केवल एक ही तरीका बताया गया है, जो धारा 117(6) में मिलता है। धारा 117(6) में राज्य सरकार और केवल राज्य सरकार को ही यह अधिकार देती है कि वह ग्रामसभा से भूमि वापस ले ले और एक नई घोषणा करके उस भूमि को किसी स्थानीय प्राधिकरण को सौंप दे।' सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के...