रांची, अप्रैल 15 -- रांची, विशेष संवाददाता। बांग्ला नव वर्ष पोएला बोइशाख उल्लास के साथ बुधवार को मनाया जाएगा। बंग समुदाय के लिए बंगाब्ध 1433 के स्वागत के लिए रांची में वंग समुदाय की ओर से विशेष तैयारी की गई है। लोग पारंपरिक वेशभूषा में सजकर पूजा-अर्चना करेंगे और सांस्कृतिक उत्सवों में भाग लेंगे। इसमें व्यापार, संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं का सुंदर संगम देखने को मिलेगा। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के लिखे गीत 'एशो हे बोइशाख एशो एशो...' गाकर नववर्ष का स्वागत किया जाएगा। इस दिन से बंग समुदाय अपने सभी शुभ कार्यों की शुरुआत करता है। विशेष रूप से व्यापारियों के लिए हालखाता (बहीखाता) की परंपरा अहम होती है। यह भी पढ़ें- घुणपोका साहित्य पत्रिका ने कैलेण्डर का किया विमोचन इसमें पुराने खातों को बंद कर नए बहीखाते की शुरुआत की जाती है। इस दिन दुकानों म...