नई दिल्ली, अक्टूबर 4 -- जापान में खेलों के एशियाई महाकुंभ का सुखद समापन उत्सव और समीक्षा का समय है। जो पदक जीते हैं, वे उत्सव मना रहे हैं और इस बार जिनका संघर्ष सफल न हुआ, वेे समीक्षा कर रहे हैं। उत्सव जितना जरूरी है, उससे ज्यादा जरूरी है समीक्षा। कोई भी देश खेलों में तभी ऊंचाई पर पहुंचता है, जब वह समीक्षा करता है और उसके अनुरूप अपनी कमियां दूर करता है। भारत ने भी अपनी अनेक कमियों को दूर करना शुरू किया है और लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में चौथे स्थान पर रहा है। पिछली बार भारत को 106 पदक मिले थे और इस बार 85 ही मिले हैं, लेकिन जीत का प्रतिशत ठीक है। इस बार भारतीय खिलाड़ियों का दल छोटा था, पर लगभग हर तीसरा भारतीय खिलाड़ी पदक के साथ लौटा है। चीन को देखें, तो उसका हर दूसरा खिलाड़ी पदक के साथ लौटा है, लेकिन ध्यान रहे, चीन खेल दुनिया में एशिय...