अलीगढ़, अगस्त 6 -- अलीगढ़। वरिष्ठ संवाददाता स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव अब फिजियोथेरेपी और पुनर्वास विज्ञान में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। इसी दिशा में मंगलायतन विश्वविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग के शोधकर्ताओं ने एक बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि हासिल की है। विश्वविद्यालय की शोधकर्ता डा. अन्नपूर्णा और डा. नेहा रानी द्वारा विकसित एक अभिनव एआई-आधारित पुनर्वास प्रणाली के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन दाखिल किया गया है।शोधकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत इस पेटेंट का शीर्षक "एन एआई-असिस्टेड टीएमजे-स्पेसिफिक योग-बेस्ड ओरल रिहैबिलिटेशन एंड हाइजीन प्रोटोकॉल इंप्लीमेंटेड थ्रू ए कंप्यूटर-इंप्लीमेंटेड रिहैबिलिटेशन गाइडेंस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम" है। इसका पेटेंट भारतीय पेटेंट कार्यालय में कराया गया है। यह भी पढ़ें- टीएमजे रोगियों को विकसित क...