गंगापार, अप्रैल 12 -- परिषदीय स्कूलों से लेकर माध्यमिक स्तर के स्कूलों में एमडीएम बनाने को लेकर हायतौबा मची हुई है। अध्यापकों का कहना है कि पहले चूल्हे पर एमडीएम बनाने पर कार्रवाई होती थी लेकिन आज जिला प्रशासन से लेकर स्थानीय प्रशासन इस समस्या को लेकर आंख और मुंह दोनों बंद किए हुए हैं। सिलेंडर के अभाव में अब लकड़ी और उपलों से चूल्हे पर खाना बनाने के लिए कहा जा रहा है। स्थिति यह है कि एकाएक मांग बढ़ने से अब जलाऊ लकड़ियों का दाम भी आसमान छूने लगा है, जिनका आवश्यकता के हिसाब से मिलना भी मुश्किल हो रहा है। अध्यापकों का कहना है कि गैस एजेंसिया उनसे आधार, अंगूठा और आंख की पुतली की फोटो चाहती हैं, यह सब कहां से उपलब्ध कराए जाएं? इसके लिए डीएम से लेकर स्थानीय प्रशासन को सम्बन्धित गैस एजेंसियो के लिए एक गाइडलाइन बनाना चाहिए। कोरांव ब्लॉक मे वर्तमा...