मोतिहारी, फरवरी 19 -- शहर में यात्री शेड नहीं हैं । वहीं, शहर से सटे एनएच पर जहां-तहां बनाए गए एक-दो यात्री शेड भी अपने मूल उद्देश्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इन शेडों पर कबाड़ दुकानदारों और चाय विक्रेताओं ने कब्जा जमा लिया है। शेड के भीतर सामान का भंडारण, अस्थायी दुकानें और टेबल-कुर्सियों की व्यवस्था कर दी गई है। इससे यात्रियों के बैठने और खड़े होने की जगह लगभग समाप्त हो गई है। गौतम सिंह का कहना है कि सरकारी बस स्टैंड में बने यात्री शेड पर गंदगी, प्लास्टिक कचरा और अव्यवस्था का अंबार देखा जा सकता है। यह न केवल सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग है, बल्कि प्रशासनिक निगरानी की कमी को भी दर्शाता है। नीरज कुमार का कहना है कि यात्री शेड का निर्माण जनता की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है। यदि उन पर अतिक्रमण हो जाए तो उनका अस्तित्व...