कुशीनगर, अगस्त 7 -- कुशीनगर, मिथिलेश द्विवेदी। मां बनने का सपना हर महिला देखती है, लेकिन एचआईवी संक्रमित महिलाओं के लिए यह सपना अक्सर एक ऐसे डर के साथ आता है, जो हर पल मन को झकझोरता है कि कहीं उनका संक्रमण उनके गर्भ में पल रहे शिशु तक न पहुंच जाए। कुशीनगर मेडिकल कॉलेज ने इसी डर को उम्मीद और मुस्कान में बदलने का काम किया है। यहां बीते एक वर्ष में 19 एचआईवी पॉजिटिव गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव कराया गया। इनमें जन्मे 10 नवजात पूरी तरह संक्रमण मुक्त पाए गए हैं, जबकि नौ अन्य बच्चों की नियमित निगरानी की जा रही है। विशेषज्ञों को भरोसा है कि वे भी स्वस्थ और एचआईवी निगेटिव रहेंगे। यह सफलता एआरटी, पीपीटीसीटी, आईसीटीसी, स्त्री एवं प्रसूति रोग और शिशु रोग विभाग की संयुक्त कोशिशों का परिणाम है।

सफलता की कहानी मेडिकल कॉलेज के एआरटी (एंटी रेट्रोवायरल थ...