नई दिल्ली, अक्टूबर 25 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस जांच की निष्पक्षता को लेकर अहम फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एक ही व्यक्ति का शिकायतकर्ता और जांच अधिकारी (आईओ) दोनों होना प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष ट्रायल के बुनियादी सिद्धांतों के खिलाफ है। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने इसी आधार पर तिमारपुर पार्षद प्रोमिला गुप्ता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी और उससे जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियों को रद्द करने का आदेश दिया है।प्राथमिकी को रद्द करने की मांग अदालत ने यह भी साफ किया है कि मजिस्ट्रेट की अदालत के अपराध का संज्ञान लेने से जांच की इस बुनियादी खामी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। पीठ ने पार्षद की ओर से दायर याचिका पर यह आदेश दिया। याचिका में दिल्ली संपत्ति विरूपण निवारण अधिनियम, 2007 की धारा तीन के तहत तिमारपुर थाने में 29 नवं...