रांची, अक्टूबर 17 -- रांची। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की पीठ ने मेंटेनेंस मामले में बड़ा आदेश देते हुए कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125(3) के तहत एक ही डिफॉल्ट के लिए पति को बार-बार 30-30 दिनों के लिए जेल नहीं भेजा जा सकता। इस धारा के तहत अधिकतम सजा एक माह ही है। मामला दुमका के दशरथ सिंह का है, जिन्हें भरण-पोषण न देने पर फैमिली कोर्ट के आदेश पर लगातार 23 बार 30-30 दिनों के लिए रिमांड पर रखकर जेल में ही रखा गया था। हाईकोर्ट ने इसे गैर-कानूनी मानते हुए स्पष्ट किया कि एक ही बकाया के लिए बार-बार जेल की सजा नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने दुमका फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को तत्काल जेल से रिहा करने का निर्देश दिया।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित...