रांची, अक्टूबर 14 -- रांची, विशेष संवाददाता। एक ही अपराध के लिए पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं में दोषी ठहराये जाने पर दोनों सजाओं को लगातार चलाने का आदेश नहीं दिया जा सकता। झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पॉक्सो एक्ट की धारा-42 के तहत दोनों कानूनों में निर्धारित सजाओं में से अधिक सजा ही दी जा सकती है। इसी आधार पर अदालत ने दुष्कर्म के मामले में आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत दी गयी अलग सजा को निरस्त कर दिया और 13 साल जेल में रहने के बाद उसे रिहा करने का आदेश दिया। जस्टिस आनंद सेन और जस्टिस प्रदीप श्रीवास्तव की खंडपीठ ने आरोपी की अपील पर सुनवाई के बाद दिया। आरोपी ने सिमडेगा के अपर सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) की अदालत द्वारा दो जुलाई 2015 को सुनाये गये दोषसिद्धि के फैसले और सात जुलाई 2015 को सुन...