फतेहपुर, अप्रैल 3 -- फतेहपुर। आटिज्म के शुरुआती लक्षण अक्सर एक से तीन वर्ष तक के बच्चों में दिखाई देने लगते हैं। इस बीमारी से ग्रसित बच्चों के व्यवहार, बोलचाल और सामाजिक संपर्क में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलता है। जिले में अब तक दर्जन भर से अधिक ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है और उन बच्चों की काउंसिलिंग भी की गई है। इसमें मनो चिकित्सक अभिभावकों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। मनोचिकित्सक डा.रिंकी ने बताया कि आटिज्म के पीछे अनुवांशिक और पर्यावरणीय कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। ऐसे बच्चे अक्सर अपने आप में खोए रहते हैं और आसपास के लोगों या बच्चों से जुड़ाव कम रखते हैं। उनका विकास भी सामान्य बच्चों की तुलना में धीमा होता है। जहां सामान्य बच्चे छह माह की उम्र में मुस्कुराना, आवाज पर प्रतिक्रिया देना और उंगली पकड़ना सीख लेते हैं, वहीं आटिज्म से प्रभ...
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