आगरा, अगस्त 28 -- दुराचार और धमकी के मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। एक माह की देरी से रिपोर्ट दर्ज की गई और अभियोजन पक्ष ने केवल पीड़िता की गवाही कराई। गवाही में विरोधाभास मिलने पर विशेष न्यायाधीश ने हरीपर्वत निवासी दीपक को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। आरोपित की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार कुशवाह ने तर्क प्रस्तुत किए। वादी ने थाना हरीपर्वत में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि उसकी 17 वर्षीय पुत्री 22 नवंबर 2019 की रात लघुशंका के लिए गई थी। देर तक न लौटने पर छत पर देखा तो दीपक उसे पकड़कर घटना को अंजाम दे रहा था। परिजन व लोगों के पहुंचने पर हंगामा हुआ। पीड़िता ने बयान दिया कि आरोपित ने पूर्व में अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया और दुराचार किया था।

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