नई दिल्ली, अप्रैल 14 -- सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक लेने के मामले में एक बड़ी व्यवस्था देते हुए स्पष्ट किया है कि सभी तरह के विवादों के निपटान और समझौते के बाद कोई भी पक्ष मनमर्जी से तलाक के मुद्दे पर पीछे नहीं हट सकता है। तलाक से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की है कि, हालांकि पति या पत्नी कानूनी तौर पर आपसी सहमति से तलाक लेने के लिए दी गई सहमति वापस लेने के हकदार होते हैं, लेकिन अगर दोनों पक्ष पहले ही सभी विवादों के पूर्ण और अंतिम निपटारे के तौर पर अपनी शादी खत्म करने पर सहमत हो चुके हों, तो ऐसी स्थिति में वे सहमति वापस नहीं ले सकते। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने यह टिप्पणी एक पत्नी पर सख्त रुख अपनाते हुए की, जिसने कोर्ट द्वारा मंज़ूर किए गए मध्यस्थता समझौते से पीछे हटने की कोशिश...
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