एक नहीं दो बार मिला बशीर बद्र की मेजबानी का मौका
पीलीभीत, मई 29 -- पीलीभीत। मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है.. यह दुनिया खूबसूरत हो गई है.. खुदा से रोज तुमको मांगता हूं ... मेरी चाहत इबादत हो गई है बशीर बद्र साहब की यह पंक्तियां आज भी राम स्वरूप पार्क में 1988 में आयोजित मुशायरे में पहुंचने वाले लोगों के जहन में ताजा हैं। मुशायरा और शायरी के बड़े फनकार बशीर पीलीभीत में एक नहीं बल्कि दो दो बार आए थे। एक बार तो मंच पर वे इतने नाराज हुए कि बिना नजराना पेश किए ही उतर कर चले गए थे। देश और दुनिया में बड़ी हस्ती व हर मिजाज के शायर व फनकार बशीर साहब का नाम बहुत ही अदब के साथ लिया जाता है। यह एक इत्तेफाक ही है कि बशीर साहब ने एक नहीं बल्कि दो दो बार यहां आकर शायरी व मुशायरे के चाहने वालों को तृप्त किया। पहली बार बशीर बद्र राम स्वरूप पार्क 1988 में आए थे। उनकी मुशायरे में मौजूद रहने वाले शायर इरफान सा...
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