धनबाद, जून 12 -- कोयला मंत्रालय की ओर से जारी कोल स्टैटिक्स पर गौर करें तो देश में बिजली आपूर्ति का सबसे भरोसेमंद स्रोत अभी भी कोयला है। पिछले एक दशक के आंकड़े को देखें तो बिजली उत्पादन में घरेलू कोयले के उपयोग में डेढ़ गुणा से ज्यादा की वृद्धि हुई है। 2015-16 में पावर प्लांटों को 478 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की गई थी। यह आंकड़ा 2024-25 में बढ़कर 870 मिलियन टन पहुंच गया है। यानी पावर प्लांटों में कोयले की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा में कोयले का अहम योगदान है। हर साल बिजली उत्पादन में कोयले की हिस्सेदारी 70 प्रतिशत से अधिक है। जलवायु परिवर्तन संबंधी मानदंडों को देखते हुए वैश्विक स्तर पर कोयले के उपयोग में कमी का दबाव है। ऐसे में कोयला अब गैसीफिकेशन के माध्यम से बदले स्वरूप में अहम ऊर्जा स्रोत का विकल्प बनने को तैयार है...