मुजफ्फरपुर, मई 15 -- मुजफ्फरपुर, प्रमुख संवाददाता। आज के दौर में जहां छोटी सी बात पर बाप-बेटे, भाई-भाई का चूल्हा बंट जाता है, वहीं कुछ परिवार ऐसे भी हैं, जिनकी कई पीढ़ियां एक ही छत के नीचे संस्कारों की थाली में प्रेम के पकवान खा रही हैं। एक रसोई के चूल्हे पर सेंकी रोटियां आपस में मिल बांटकर ये परिवार खा रहे हैं। आज भी कई ऐसे परिवार हैं, जहां व्यक्तिगत सुख-दुख से बढ़कर सामूहिक सुख-दुख को महत्व दिया जा रहा है। पिछली कई पीढ़ियों से ऐसे लोग संयुक्त परिवार में जी रहे हैं। दादा-दादी, मां-पिताजी, भैया-भाभी, भाई, भतीजा, चाचा-चाची जैसे रिश्ते। हंसी-ठिठोली, बच्चों की किलकारी, शरारत, मां-बाप की फटकार, दादा-दादी का बचाव, कहानी-किस्से एक छत के नीचे रह रहे परिवार के सदस्यों को ही नसीब होती है। इन परिवारों में पल रहे लोगों को एक रसोई में साझी खुशियां नस...