नई दिल्ली, अप्रैल 10 -- इमरान प्रतापगढ़ी,सांसद, राज्यसभा समान नागरिक संहिता के प्रति भारतीय जनता पार्टी का दृष्टिकोण संवाद का नहीं, बल्कि एक छिपे हुए आदेश का है। जिस तत्परता से इसे आगे बढ़ाया जा रहा है, उसे देखते हुए एक सीधा सवाल उठता है- अभी क्यों? बिना सहमति बनाने की धैर्यपूर्ण प्रक्रिया के, राज्य-दर-राज्य यह आग्रह क्यों? इसका उत्तर सुधार में नहीं, राजनीति में निहित है। 'एक देश, एक कानून' का नारा सुनने में आकर्षक लग सकता है, पर इसके भीतर एक गहरी चिंता छिपी है। भारत जैसे विविधरंगी देश में एकरूपता कभी निष्पक्ष नहीं होती। वह हमेशा किसी-न-किसी चयन का परिणाम होती है। आज कई नागरिक एक सरल प्रश्न पूछ रहे हैं- यह कानून किसका होगा? किन परंपराओं को इसमें स्थान मिलेगा? उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में हाल के मॉडल ने इन चिंताओं को और गहरा किया है...