नई दिल्ली, जुलाई 3 -- राष्ट्रीय राजधानी में एक्सप्रेसवे और हाईवे लाइफलाइन बन चुके हैं, लेकिन विभागीय लापरवाही इन पर सफर करने वालों की जान के लिए खतरा बनी हुई है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर लेन मार्किंग का न होना और एनएच-9 पर एसओएस बॉक्सों का खराब पड़ा रहना, इसी लापरवाही का नतीजा है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर तो एसओएस सुविधा शुरू से ही उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिससे आपात स्थिति में वाहन चालकों के पास मदद मांगने का कोई सीधा जरिया नहीं बचता। तेज रफ्तार पर नियंत्रण के लिए सीमित संख्या में स्पीड रडार जरूर लगाए गए हैं, जो निर्धारित गति सीमा से तेज चल रहे वाहनों को चिह्नित कर लेते हैं। लेकिन चालकों को समय रहते सतर्क होने और अपनी गति नियंत्रित करने का मौका देने के लिए जरूरी स्पीड डिस्प्ले बोर्ड कहीं नहीं लगाए गए। यह भी पढ़ें- मर्जिंग पॉइंट पर...