लखनऊ, मई 19 -- सैन्य सेवा के दौरान गंभीर बीमारी हुई। मेडिकल बोर्ड ने 60 प्रतिशत दिव्यांगता सेवा से संबंधित माना। सेना ने आजीवन दिव्यांगता पेंशन स्वीकृत की। 17 वर्ष तक पेंशन मिली, लेकिन बैंक और केंद्रीय पेंशन प्रोसेसिंग केन्द्र ने बिना किसी आदेश या पूर्व सूचना उनकी न सिर्फ पेंशन रोकी बल्कि सेवा पेंशन से कटौती भी शुरू कर दी। ठीक से इलाज नहीं करा सके और बीमारी के कारण उनका निधन हो गया। उनकी विधवा पत्नी यानी वीर नारी ने मजबूती से मुकदमा लड़ा। आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (एएफटी), क्षेत्रीय पीठ ने कटौती को अवैध और मनमाना करार दिया। बैंक को फटकार लगाई और काटी गई समस्त धनराशि वापस करने का आदेश दिया है। यह भी पढ़ें- सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी! कैबिनेट सचिव ने पेंशन समेत इन 5 फैसलों पर दिया बड़ा आश्वासन न्यायमूर्ति उमेश चंद्र शर्मा एवं मे...