धनबाद, अगस्त 2 -- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-एआई) केवल एक नई तकनीक नहीं, बल्कि समस्याओं को समझने, उनका समाधान खोजने और लगातार सीखने का नया तरीका है। आनेवाले समय में यही शिक्षा, शोध और नवाचार की दिशा तय करेगा। उक्त बातें आईआईटी खड़गपुर के पूर्व निदेशक एवं कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विशिष्ट प्रोफेसर प्रो. पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने शनिवार को आईआईटी आईएसएम के पेनमैन ऑडिटोरियम में आयोजित फैकल्टी संबोधन में कहीं। उन्होंने कहा कि एआई की बुनियाद रिप्रेजेंटेशन, रीजनिंग और लर्निंग पर आधारित है। यदि किसी समस्या को सही ढंग से प्रस्तुत किया जाए, उस पर तर्क किया जाए और हर समाधान से सीख ली जाए तो एआई लगातार बेहतर होता जाता है। यह भी पढ़ें- रसायन विज्ञान में एआई की बढ़ी भूमिका उन्होंने बताया कि एआई अब एल्गोरिदमिक, सांख्यिकीय ...