देहरादून, फरवरी 15 -- दून यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन स्टडीज़ में "एआई के जमाने में न्यूज और जर्नलिज्म का भविष्य" विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में पत्रकार राजेश महापात्रा ने मीडिया पेशेवरों को स्पष्ट संदेश दिया किएआई के मास्टर बनें, गुलाम नहीं। महापात्रा ने कहा कि न्यूजरूम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब वास्तविकता बन चुका है और प्रोडक्शन व डेस्क से जुड़े पत्रकारों को तुरंत अपने कौशल अपडेट करने होंगे, अन्यथा पेशेवर विस्थापन का जोखिम बढ़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई डेटा-आधारित रिपोर्टिंग में सहायक है, लेकिन खोजी पत्रकारिता, स्रोत निर्माण और नैतिक निर्णय मानवीय क्षमता ही है। डीन प्रो. राजेश कुमार ने 'स्किल गैप' को सबसे बड़ा खतरा बताया। प्रो. हर्ष डोभाल ने कहा कि मजबूत बौद्धिक आधार के बिना एआई का सही उपयोग संभव नहीं। क...