जमशेदपुर, अप्रैल 27 -- एआई डॉक्टरों की विभिन्न तरीकों से सहायता कर उनका समय बचा सकता है, लेकिन डॉक्टरों का विकल्प नहीं बन सकता। ये बात रविवार को बिष्टूपुर में इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन (आईआरआईए) के सेमिनार में मुंबई से आई रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टर मालिनी लवांडे ने कही। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अल्ट्रासाउंड, एमआरआई, सीटी स्कैन समेत कई मशीनों में डॉक्टरों की मदद करता है। वह पूरी रिपोर्ट नहीं दे सकता और बीमारी की सही पहचान भी नहीं कर सकता। यह काम डॉक्टर को ही करना होता है। एआई केवल गणना में सहायता करता है, जिससे समय बचता है।डॉ. लवांडे ने कहा कि आज अल्ट्रासाउंड और एमआरआई की नई मशीनों से छोटी-छोटी नसों को भी आसानी से देखा जा सकता है। एक्स-रे और सीटी स्कैन में रेडिएशन बहुत कम होता है, इससे मरीज ज्यादा प्रभावित नहीं होत...