नई दिल्ली, मार्च 26 -- सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से तैयार किए गए ऐसे फैसले, जो हकीकत में किसी अदालत ने पारित ही नहीं किए हैं, मिसाल के तौर पर हवाला देने के बढ़ते चलन को गंभीर खतरा बताया। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह खतरा सिर्फ भारत में हीं नहीं, पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। जस्टिस राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की पीठ ने एआई से तैयार फर्जी फैसलों का हवाला देने के चलन से बढ़ते खतरे का जिक्र करते हुए अदालतों, जज सहित सभी पक्षों को सावधान रहने को कहा है। पीठ ने यह टिप्पणी, बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा की गई टिप्पणी के खिलाफ एक निजी कंपनी के निदेशक की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए की। याचिका में हाईकोर्ट द्वारा की गई उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की थी, जो तब की गई थीं जब एआई का इस्तेमाल करके ...
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