रामगढ़, अगस्त 2 -- बरकाकाना, निज प्रतिनिधि। मदरसा अहले सुन्नत नूरुल इस्लाम, अंसाराबाद डुडगी में रविवार को उर्स-ए-क़ाइद-ए-अहले सुन्नत मनाया गया। इसका आयोजन एदारा-ए-शरिया रामगढ़, डुडगी और ख़िदमत-ए-इंसानियत फ़ेडरेशन रामगढ़ ने संयुक्त रूप से किया। इसकी शुरुआत तिलावत-ए-कुरआन से हुई। जलसे में मुख्य वक्ता जानशीन-ए-रईसुल क़लम हज़रत अल्लामा डॉ ग़ुलाम ज़रक़ानी क़ादरी, सदर, ऑल अमेरिकन इस्लामिक मिशन ने अपने संबोधन में तालीम की अहमियत पर विस्तार से प्रकाश डाला। अनेक मस्जिदों एवं मदरसों के संस्थापक, क़ाइद-ए-अहले सुन्नत हज़रत अल्लामा अरशदुल क़ादरी अलैहिर्रहमा के दीन, इल्म और समाज के लिए दी गई सेवाओं को याद किया गया। इस्लाम की पहली शिक्षा ही इक़रा(पढ़ो) से शुरू होती है, जो ज्ञान के महत्व को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता का दायित्व है कि वे अपन...