कुशीनगर, मार्च 31 -- कुशीनगर। दुनिया को अहिंसा का संदेश देने वाले जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की निर्वाण स्थली विकास के मामले में अब भी काफी पीछे है। हालांकि, मुख्यमंत्री द्वारा इसका नाम पावापुरी करने की घोषणा से इसके विकास और असली पहचान मिलने की उम्मीद जगी है।फाजिलनगर क्षेत्र में कई ऐसे टीले हैं, जिन्हें महावीर पर शोध करने वाले इतिहासकार भी प्रमाणित कर चुके हैं। फिर भी इन्हें पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है। लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में भी पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिन्हें सहेजकर पर्यटनस्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। यहां वीरभारी का टीला है। बदुरांव में भोगनगर, फरेंदहा में चंद्रस्थल, बकुलहर में घोड़धाप और नदवा गांव में नंदग्राम का टीला है। ये टीले पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व को सहेजे हु...