सीवान, मार्च 1 -- सीवान। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाला दुग्ध उत्पादन इन दिनों गंभीर चुनौतियों से गुजर रहा है। वर्षों से दूध उत्पादन पशुपालक किसानों के जीविकोपार्जन का प्रमुख साधन रहा है, लेकिन अब बढ़ती लागत और घटते मुनाफे ने किसानों की कमर तोड़ दी है। गाय-भैंस की कीमतों में लगातार वृद्धि, चारा और दवा के बढ़ते खर्च के बावजूद दूध का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। यदि समय रहते सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में शुद्ध दूध की किल्लत हो सकती है। किसानों का कहना है कि सरकार की योजनाओं का लाभ उन्हें सहजता से नहीं मिल पाता। जटिल प्रक्रियाओं और कागजी औपचारिकताओं के कारण अधिकांश पशुपालक योजना से वंचित रह जाते हैं। कुछ मामलों में बिचौलियों की भूमिका भी सामने आती है, जिससे अनुदान का लाभ सही किसानों तक नहीं पहुंच पाता। सरका...