रामगढ़, फरवरी 16 -- रामगढ़, निज प्रतिनिधि ब्रज गोपिका सेवा मिशन की ओर से छावनी फुटबॉल मैदान में आयोजित 21 दिवसीय प्रवचन श्रृंखला के 17वें दिन सोमवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए स्वामी युगल शरण ने भक्ति के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उपनिषद् रूपी धनुष उठाकर, उपासना रूपी बाण लगाकर और भाव से उसे तीक्ष्ण बनाकर ही मनुष्य ब्रह्म का साक्षात्कार कर सकता है। यही मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य है। स्वामी जी ने बताया कि अन्यभिलाषिताशून्यं के आधार पर भक्त दो प्रकार के होते हैं-सकाम और निष्काम। सकाम भक्त भी तीन प्रकार के होते हैं। प्रथम प्रकार के भक्त भगवान को प्राप्त करने के बाद भी सांसारिक वस्तुओं की इच्छा रखते हैं। दूसरे प्रकार के भक्तों को भगवान स्वयं कुछ प्रदान करते हैं। जबकि तीसरे और श्रेष्ठ सकाम भक्त वे होते ह...