शामली, सितम्बर 11 -- थानाभवन। अग्रवाल धर्मशाला मे चल रही श्री मद्भागवत कथा के छठे दिन कथा व्यास राज दास महाराज ने कहा उद्धव एवं गोपी संवाद ज्ञान पर प्रेम की सर्वोच्च विजय को दर्शाता है। इसका आध्यात्मिक अर्थ यह है कि ईश्वर को केवल शुष्क बौद्धिक ज्ञान, योग या नियमों से नहीं, बल्कि एक निस्वार्थ और समर्पण भाव प्रेम से ही पाया जा सकता है।

उद्धव और गोपियों का संवाद उद्धव परम ज्ञानी, योग-मार्गी और निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे, जबकि गोपियाँ सगुण प्रेम की मूर्ति थीं। संवाद के अंत में, उद्धव का ज्ञान गोपियों के अनन्य प्रेम के आगे नतमस्तक हो जाता है और वे स्वयं प्रेम-भक्ति के रंग में रंग जाते हैं। उद्धव को अपने ज्ञान का अहंकार था। गोपियाँ उन्हें बताती हैं कि ईश्वर कोई गणित या सिद्धांत नहीं, बल्कि अनुभूति है। यह अहंकार शून्यता आत्मसमर्पण की ओर ले जाता...