समस्तीपुर, अप्रैल 5 -- समस्तीपुर। आधुनिक चिकित्सा की चमक और अंग्रेजी दवाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच समस्तीपुर में प्राचीन देशी चिकित्सा पद्धतियां आयुर्वेद, होम्योपैथी और यूनानी आज प्रशासनिक उपेक्षा की आईसीयू में जिंदगी और अस्तित्व की जंग लड़ रही हैं। विडंबना यह है कि जिन चिकित्सा पद्धतियों की उपयोगिता को पूरी दुनिया स्वीकार कर रही है, वही समस्तीपुर में बदहाली का शिकार होकर धीरे-धीरे हाशिये पर पहुंचती जा रही हैं। शहर के थानेश्वर स्थान मंदिर के समीप स्थित जिला संयुक्त औषधालय पिछले 44 वर्षों से एक जर्जर भवन में किसी तरह अपनी सेवाएं दे रहा है। यह भवन न केवल अपनी पुरानी संरचना की कहानी कहता है, बल्कि सरकारी उदासीनता का भी मूक गवाह बना हुआ है। रिक्त पदों ने बढ़ाई परेशानी : इस औषधालय की सबसे बड़ी समस्या यहां के आवश्यक पदों का लंबे समय से खाली रहना ह...