नई दिल्ली, मार्च 5 -- राजस्थान की धरती वीरता, परंपराओं और अनोखी लोक संस्कृति के लिए जानी जाती है। यहां होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि इतिहास और शौर्य की गाथाओं को जीवंत करने का अवसर भी बन जाती है। उदयपुर से करीब 45 किलोमीटर दूर स्थित मेनार गांव में बुधवार रात ऐसा ही अद्भुत नजारा देखने को मिला, जब यहां 451 साल पुरानी परंपरा के तहत 'बारूद की होली' खेली गई। आधी रात को लाल पगड़ियां, पारंपरिक पोशाक और हाथों में तलवारें लिए ग्रामीण जब चौक में इकट्ठा हुए तो माहौल किसी युद्धभूमि जैसा लगने लगा। चारों ओर तोपों की गर्जना, बंदूकों की गूंज और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच गांव ने एक बार फिर मुगल चौकी पर मिली ऐतिहासिक जीत की याद को जीवंत कर दिया।शौर्य की याद में बारूद की होली मेनारिया ब्राह्मण समाज इस परंपरा को सदियों से निभाता आ रहा है। मान्यता ह...
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