नई दिल्ली, दिसम्बर 23 -- उत्तराखंड में 2866 एकड़ अधिसूचित वन भूमि पर निजी कब्जों का मामला बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पर्यावरण के लिए खतरा करार देते हुए कहा कि यह व्यवस्थित हड़प है, जो राज्य की नाजुक हिमालयी इकोलॉजी को तबाह कर सकता है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य सरकार को 'मूक दर्शक' बताकर फटकार लगाई और स्वतः संज्ञान लेकर जांच कमेटी गठित करने के आदेश दिए। जंगल में लूट का खेल मामला 1950 का है, जब ऋषिकेश की पशुलोक सेवा समिति को भूमिहीनों के लिए लीज पर जमीन दी गई थी। 1984 में समिति ने 594 एकड़ वापस की, लेकिन बाकी पर निजी कब्जे बने रहे। कोर्ट ने कहा, "हजारों एकड़ वन भूमि आंखों के सामने हड़पी जा रही है, फिर भी अधिकारी चुप हैं।" अब मुख्य सचिव और प्रधान वन संरक्षक जांच रिपोर्ट देंगी। खाली जमीन पर वन विभाग कब्जा लेगा, कोई नया निर्म...