देहरादून, सितम्बर 28 -- उत्तराखंड में खाली और परती कृषि भूमि पर किसान अब जंगली जड़ी-बूटियों की खेती कर पाएंगे। यह ग्रामीणों की आजीविका का नया आधार बनेगा। राज्य की पांच हजार वन पंचायतों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य में पहली बार बड़े पैमाने पर निजी भूमि को जड़ी-बूटी खेती से जोड़ने की पहल की गई है। हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर को छोड़कर प्रबंधक निदेशक उत्तराखंड गैर-काष्ठ वन उत्पाद तथा हर्बल एवं एरोमा टूरिज्म स्वायत्त सहकारी फेडरेशन ने 11 जिलों में इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस स्थानीय लोगों के लिए गांव में ही स्वरोजगार के स्थायी अवसर पैदा होंगे। इसमें पारंपरिक चिकित्सा और हर्बल उद्योगों में उपयोग होने वाली जड़ी बूटियों कोे खेतों में उगा पाएंगे। यह भी पढ़ें- बारिश से 15000 चारधाम यात्री फंसे; केदारनाथ-हेमकुंड यात्रा थ...