नैनीताल, जनवरी 27 -- उत्तराखंड के जंगलों में बाघ के भोजन पर सर्वे हो रहा है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) द्वारा हर चार वर्ष में यह कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष यह इसलिए भी अहम और जरूरी हो गया है, क्योंकि वन्य जीव-मानव संघर्ष की घटनाओं में रिकॉर्डतोड़ बढ़ोत्तरी हुई है। बाघ ही नहीं, भालू और गुलदार के हमलों में कई लोगों की मौत हुई है। अखिल भारतीय बाघ गणना के दूसरे चरण में हल्द्वानी वन प्रभाग के जंगलों में बाघों के प्रिय भोजन की उपलब्धता पर विशेष सर्वेक्षण शुरू होने जा रहा है। इस सर्वे को लाइन ट्रांजेक्ट सर्वे कहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस सर्वे में जंगलों में बाघ के मुख्य भोजन स्रोत काकड़, चीतल, सांभर सहित अन्य शिकार प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की जाएगी। यह भी पढ़ें- उत्तराखंड में डराएगा मौसम; बर्फबारी के साथ बिजल...
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