देहरादून, मई 4 -- उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड भंग होने और मदरसों को शिक्षा विभाग एवं अल्पसंख्यक प्राधिकरण से मान्यता लेने के सख्त नियमों के बाद आधे से ज्यादा मदरसों पर बंदी की तलवार लटकी है। प्राधिकरण से मान्यता के लिए तय की गई 11 शर्तों ने मदरसा संचालकों के पसीने छूटे हैं। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजानदास एवं प्राधिकरण अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह तक मदरसा संचालक पहुंचे हैं। जमीयत उलमा ए हिंद और मदरसा एसोसिएशन की ओर से मदरसों में धार्मिक शिक्षा के लिए मान्यता को बाध्य न करने की मांग उठाई गई है। प्रदेशभर में मदरसा बोर्ड से 452 मदरसों को मान्यता मिली है। इनमें से यूएसनगर, हरिद्वार और देहरादून में करीब 150 मदरसे ऐसे है। जो पहले से ही स्कूल की तर्ज संचालित होते है और दीनी तालीम भी देते है। बच्चों से फीस भी लेते है। इन्होंने मान्यता मदरसा बोर्ड से ल...
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