एटा, अप्रैल 13 -- राजा का रामपुर, राजेश मिश्रा। कभी खेतों में लहलहाती फसलें किसानों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आती थीं। इस बार बेमौसम बारिश ने किसान का सब कुछ छीन लिया। आलू की मार से किसान अभी उभर भी नहीं पाया था। तब तक गेहूं, तंबाकू की फसलें खेतों में ही बर्बाद हो गईं। जिन हाथों ने दिन-रात मेहनत कर अन्न उगाया। आज वही हाथ खाली हैं। घर में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया है। किसानों की आंखों में अब सिर्फ चिंता है कि परिवार का पेट कैसे भरेगा। बच्चों की पढ़ाई कैसे चलेगी। यह सवाल उन्हें हर पल कचोट रहे हैं। नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूलों की मनमानी खुलकर सामने आ गई है। अभिभावकों को तय दुकानों से ही किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हालात इतने बदतर हैं कि 20 रुपये की कॉपी 40 रुपये में, 300 रुपये के जूते 800 रुपय...
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