विकासनगर, दिसम्बर 24 -- श्री बूढ़ा महादेव मंदिर में चल रहे भागवत कथा ज्ञान यज्ञ अनुष्ठान के तीसरे दिन बुधवार को कथा व्यास ने कहा कि मनुष्यों का क्या कर्तव्य है इसका बोध भागवत सुनकर ही होता है। विडंबना ये है कि मृत्यु निश्चित होने के बाद भी हम उसे स्वीकार नहीं करते हैं। सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है। कथा व्यास प्रेम नारायण महाराज ने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। उन्होंने कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने ...
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