बक्सर, मार्च 11 -- पेज चार के लिए ---- प्रवचन दानवों ने मंदराचल पर्वत से समुद्र का मंथन कर 14 रत्न प्राप्त किए तीन पग भूमि मांगी और तीन पगों में ही संपूर्ण ब्रह्मांड को नाप लिया फोटो संख्या 22 कैप्शन- बुधवार को चौसा में श्रीमद्भागवत कथा करते आचार्य रणधीर ओझा। बक्सर, हिन्दुस्तान संवाददाता। चौसा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान कृष्ण के जन्म प्रसंग का वर्णन हुआ। आचार्य रणधीर ओझा ने प्रवचन करते हुए कहा कि प्रह्लाद वैसे बालक थे, जिनकी भक्ति ने अधर्म के प्रतीक हिरण्यकश्यप के साम्राज्य को हिला दिया। विपरीत परिस्थितियों, अत्याचार और मृत्यु के भय के बावजूद प्रह्लाद ने एक क्षण के लिए भी भगवान नारायण से अपनी निष्ठा नहीं हटाई। यह कथा सिखाती है कि जब तक मन में ईश्वर के प्रति विश्वास है तब तक कोई भी संकट मनुष्य को डिगा नहीं सकता। समुद्र म...