मिर्जापुर, जनवरी 31 -- लहगंपुर। क्षेत्र के तेंदुई स्थित जानकी कुंज मंदिर परिसर में नौ दिवसीय श्रीरामकथा के आठवें दिन भक्ति, दर्शन और सामाजिक समरसता की त्रिवेणी बही। संत बालयोगी संजय महाराज ने राम-केवट संवाद के मार्मिक प्रसंग की व्याख्या करते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि ईश्वर भक्ति के लिए किसी पद, धन या ऊँची जाति की आवश्यकता नहीं होती बल्कि इसके लिए केवल निर्मल भाव और अटूट विश्वास अनिवार्य है। महाराज ने कहा कि गंगा तट पर जब केवट प्रभु के चरण पखारने की जिद्द किया तो वह उसकी चतुरता नहीं बल्कि भक्ति की पराकाष्ठा थी। केवट को भय था कि जिस चरण स्पर्श से पत्थर की शिला अहिल्या बन गई,कहीं उसकी लकड़ी की नाव भी नारी न बन जाए। वास्तव में यह तर्क देकर उसने अपना सेवा का अधिकार सुरक्षित किया। महाराज ने भावपूर्ण शब्दों में समझाया कि जैसे हम अपने घर और परि...