जौनपुर, फरवरी 9 -- मछलीशहर, हिन्दुस्तान संवाद। मीरगंज क्षेत्र के श्री राम जानकी मंदिर पंगुल आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शनिवार को कथा वाचक शुभम महाराज ने कहा कि जीव, ईश्वर का ही अंश है। परन्तु अज्ञान के कारण वह भ्रम में रहता है। उन्होंने इसकी मृग मरीचिका के भ्रम से तुलना की। बताया कि जैसे रेगिस्तान में मृग दूर जल दिखाई देने पर भ्रमित होता है, वैसे ही जीव अज्ञानता में अपनी असली पहचान को नहीं समझ पाता। श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण करने के लिए श्रोता को निष्कपट और मत्सर रहित होना आवश्यक है। कथा श्रवण और आत्मसात करने से जीवन के तीनों ताप, माया, मत्सर और मोह का नाश होता है। संगीतमय कथा में प्रदीप शुक्ला, उमेश और विनय मिश्रा वाद्य यंत्रों के माध्यम से सहयोग कर रहे हैं। कथा 14 फरवरी को समाप्त होगी। उसी दिन श्री शत् चंडी महायज्ञ ...